इंटरनेट में मिलने वाली 98 प्रतिशत जानकारी दुनिया की जिन गिनी-चुनी 12 भाषाओं में है, उसमें हिंदी भी है । वैज्ञानिक और साहित्यिक बुद्धिजीवियों के प्रयासों से हमारी हिंदी विदेशी भाषाओं के समानांतर आगे बढ़ रही है । इंटरनेट द्वारा वैश्विक प्रतिष्ठा के हनुमान को अब अँगरेज़ी की सुरसा नामक राक्षसी नहीं भरमा सकती । वहाँ अब हिंदी और साहित्य लेखन – पठन - पाठन और उसकी बहुआयामी आवाज़ाही की लगभग सारी अपरिहार्य तकनीकी-कलायें मौजूद हैं । ऐसे में उस सूचना प्रौद्योगिकी के प्रति, जिसका हिंदी से भी रिश्ता कायम हो रहा है, विश्वास जताया जा सकता है कि – कौन सो संकट मोर ग़रीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो ।...